बिजली इमारत तक कैसे पहुँचती है
आकाशीय बिजली का ख़तरा सिर्फ़ सीधे वार से नहीं है। बिजली तीन रास्तों से इमारत तक आ सकती है: सीधा वार (जब विद्युत-चाम छत या दीवार पर गिरती है), आपूर्ति लाइन पर सर्ज (जब किलोमीटरों दूर वार होता है और तरंगें तारों पर चलकर घर तक आती हैं), और ज़मीनी विभवांतर (जब ज़मीन में बड़ा करंट बहता है और अर्थिंग पॉइंट के बीच अंतर बन जाता है)।
तीनों का असर अलग है। सीधे वार में विशाल करंट और ऊर्जा संरचना में जाती है; लाइन के सर्ज में तुलना में छोटा करंट, पर वह घर के अंदर के संवेदनशील उपकरणों — रेफ़्रिजरेटर का कंट्रोल बोर्ड, टीवी, राउटर — के लिए सबसे बड़ा ख़तरा है। इसलिए मानक केवल एक ही बात पर ध्यान नहीं देता; वह तीनों रास्तों को साथ-साथ देखता है।
IEC 62305 श्रृंखला इसी आधार पर बनी है: पहले जोखिम का आकलन (भाग 1), फिर बाहरी सुरक्षा (भाग 2), फिर संरचना की आंतरिक सुरक्षा और सर्विस इंस्टॉलेशन (भाग 3), और अंत में विद्युत/इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों की सुरक्षा, जहाँ SPD की बात होती है (भाग 4)।
बाहरी सुरक्षा: तीन हिस्से, एक काम
बाहरी प्रोटेक्शन प्रणाली के तीन हिस्से हैं और तीनों मिलकर काम करते हैं: एयर टर्मिनल (छत पर वह रॉड या जाली जो वार को रिसीव करती है), डाउन कंडक्टर (करंट को नीचे ले जाने वाले तार, आम तौर पर दो या ज़्यादा, जो संरचना के चारों ओर बँटे होते हैं), और अर्थ टर्मिनेशन (जहाँ करंट ज़मीन में जाता है)। तीसरा हिस्सा अक्सर हल्के में लिया जाता है, जबकि ज़मीन का प्रतिरोध ही तय करता है कि विभवांतर कितना बनेगा।
सिस्टम का आकार जोखिम आकलन से तय होता है, न कि सिर्फ़ ऊँचाई से। मानक सुरक्षा स्तर (LPL) के चार स्तर रखता है, और हर स्तर के लिए डाउन कंडक्टर पर आने वाले करंट का मान तय है:
| सुरक्षा स्तर | Iimp (10/350 µs, प्रति डाउन कंडक्टर) |
|---|---|
| LPL I | 100 kA |
| LPL II | 75 kA |
| LPL III और IV | 50 kA |
ये मान IEC 62305 के संदर्भ हैं; व्यवहार में आवासीय इमारतें अक्सर निचले स्तरों पर आती हैं, जबकि अस्पताल या रासायनिक संयंत्र जैसी जगहें ऊँचे स्तर की माँग करती हैं। बाहरी प्रणाली में दूरी (सेपरेशन डिस्टेंस) का भी ध्यान रखना होता है — डाउन कंडक्टर और अंदर की धातु की वस्तुओं के बीच जितनी दूरी तय हो, उससे कम पर स्पार्किंग का ख़तरा है। इसीलिए लोहे की छत, पानी की पाइप और डक्ट जैसी हर धातु की वस्तु को बराबरी बंधन (इक्विपोटेंशियल बॉन्डिंग) से जोड़ा जाता है।
आंतरिक सुरक्षा: बराबरी बंधन और SPD
बाहरी प्रणाली वार को रिसीव कर ले, तब भी ख़तरा ख़त्म नहीं होता। डाउन कंडक्टर में बहते करंट से चुंबकीय और विद्युत क्षेत्र बनते हैं, और अंदर बिछी लूप वायरिंग में वोल्टेज उत्पन्न हो जाता है। साथ ही, ग्राउंड लूप से भी अतिरिक्त विभवांतर आता है। इन दोनों का इलाज आंतरिक सुरक्षा है।
पहला क़दम बराबरी बंधन है: इमारत में प्रवेश करने वाली हर धातु की सेवा — पानी, गैस, डेटा केबल की शीथ — को अर्थ बस से जोड़ना। दूसरा क़दम सर्ज प्रोटेक्टिव डिवाइस (SPD) है: यह उपकरण अचानक आई ऊँची वोल्टेज को सीमित करके पृथ्वी तक ले जाता है, जिससे उपकरण पर पड़ने वाला वोल्टेज उसकी सहन-सीमा से नीचे रहता है।
SPD तीन परीक्षण प्रकारों में आते हैं, और उनकी जगह उनके काम से तय होती है:
| प्रकार | परीक्षण | जहाँ लगता है | काम |
|---|---|---|---|
| Type 1 | 10/350 µs वर्तमान लहर | मेन इनलेट/डिस्ट्रीब्यूशन पैनल | सीधे वार और बड़े सर्ज का हिस्सा सोखना |
| Type 2 | 8/20 µs वर्तमान लहर | सब-पैनल और मशीनरी पैनल | लाइन के सर्ज को सीमित करना |
| Type 3 | 8/20 µs, छोटी ऊर्जा | संवेदनशील उपकरण के पास | अंतिम स्तर की सुरक्षा |
SPD का समन्वय: Uc, Up और क्रम
SPD चुनते समय तीन बातें तय करनी होती हैं: स्थान, क्रम और विनिर्देश। स्थान की बात ऊपर हो चुकी है। क्रम का मतलब है कि मेन इनलेट पर Type 1, उसके बाद पैनल में Type 2 और ज़रूरत पड़ने पर उपकरण के पास Type 3 — तीनों के बीच केबल की पर्याप्त लंबाई या अलगाव, ताकि ऊर्जा बँट सके और कोई एक अकेला न टूटे।
- Uc (निरंतर वोल्टेज): सिस्टम के सामान्य वोल्टेज से ऊँचा हो, ताकि सामान्य स्थिति में यह चालू न रहे; आम अभ्यास में U₀ से करीब दस प्रतिशत अधिक।
- Up (वोल्टेज सीमा): जो वोल्टेज SPD के बाद उपकरण तक पहुँचता है; वह उपकरण की सहन-सीमा से कम होना चाहिए — 230/400 V प्रणालियों में आम उपकरणों की सहन-सीमा अक्सर 2,5 kV मानी जाती है।
- Iimp / In: वह अधिकतम करंट जो SPD बिना टूटे झेल सकता है; यह ऊपर दिए गए सुरक्षा स्तर के अनुसार चुना जाता है।
- सुरक्षा निकासी: SPD ख़राब होने की स्थिति में आग न लगे — इसके लिए बिल्ट-इन थर्मल और ओवर-करंट सुरक्षा का होना ज़रूरी है।
ध्यान रखें: एक अच्छा SPD पुराने उपकरण को नया नहीं करता, बस उसे टूटने से बचाता है। सुरक्षा तब पूरी होती है जब बाहरी प्रणाली, बराबरी बंधन और SPD तीनों एक-दूसरे से मेल खाते हों।
शुरुआत करते समय क्या देखें
- पहले जोखिम आकलन करें — क्या इमारत को सुरक्षा प्रणाली की ज़रूरत है, और किस स्तर की। बिना आकलन के लगाया गया सिस्टम या तो कमज़ोर रहता है या ज़रूरत से ज़्यादा।
- सभी धातु की सेवाओं का बंधन जाँचें — पानी, गैस, डक्ट, डेटा शीथ; इनमें से एक भी छूटा तो विभवांतर अंदर घुस जाएगा।
- SPD का क्रम और लंबाई तय करें — Type 1 और Type 2 के बीच पर्याप्त केबल हो, वरना दोनों में से एक अकेला सारी ऊर्जा झेलता है।
- Up और उपकरण की सहन-सीमा मिलाएँ — विनिर्देश पढ़ें, नाममात्र वोल्टेज नहीं।
- अर्थिंग का प्रतिरोध मापें और दस्तावेज़ में लिखें — साइट पर बाद में यही आँकड़ा रखरखाव का आधार बनता है।
लाइटनिंग प्रोटेक्शन में सबसे आम ग़लती यही है कि सिर्फ़ छत पर रॉड लगाकर विषय को निपटा दिया जाता है। दूसरी आम बात पुराना SPD है: यह उपकरण एक बार झटका झेलने के बाद धीरे-धीरे कमज़ोर होता जाता है, इसलिए इसकी नियमित जाँच या बदलने की योजना पहले से होनी चाहिए; अधिकतर आधुनिक SPD में स्थिति बताने वाला संकेतक भी होता है।
असली सुरक्षा तब बनती है जब वार को रिसीव करने, उसे ज़मीन तक ले जाने और अंदर आने वाली तरंगों को सीमित करने — तीनों काम एक योजना के तहत हों, और उनकी जाँच दस्तावेज़ों में दर्ज हो।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
लाइटनिंग प्रोटेक्शन सिस्टम किन इमारतों में ज़रूरी है?
IEC 62305 के जोखिम आकलन से तय होता है। ऊँची इमारतें, खुले मैदान में अकेली इमारतें और संवेदनशील उपकरणों वाली जगहें — अस्पताल, डेटा सेंटर, औद्योगिक प्लांट — में यह सामान्य तौर पर ज़रूरी मानी जाती है।
Type 1 और Type 2 SPD में क्या फ़र्क़ है?
Type 1 का परीक्षण 10/350 µs लहर से होता है और वह सीधे वार की ऊर्जा झेलता है; Type 2 का परीक्षण 8/20 µs लहर से होता है और वह लाइन पर आने वाले सर्ज को सीमित करता है।
SPD कहाँ लगाना चाहिए?
मुख्य इनलेट पर Type 1 (या Type 1+2 कॉम्बो), फिर सब-पैनल में Type 2, और बहुत संवेदनशील उपकरण के पास ज़रूरत पड़ने पर Type 3। दोनों स्तरों के बीच पर्याप्त केबल लंबाई रखें।
SPD का Up कितना होना चाहिए?
वह उपकरण की सहन-सीमा से कम होना चाहिए। 230/400 V प्रणालियों में आम उपकरणों की सहन-सीमा अक्सर 2,5 kV मानी जाती है, इसलिए चुने गए SPD का Up उससे नीचे हो।
क्या सिर्फ़ छत पर रॉड लगाना काफ़ी है?
नहीं। रॉड सिर्फ़ एक हिस्सा है; बिना डाउन कंडक्टर, ठोस अर्थ टर्मिनेशन, बराबरी बंधन और SPD के वो रॉड सुरक्षा पूरी नहीं करता।